ISSN2320-5733

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कविता : करोना करोना करोना करोना करोना पर भोजपुरी में कविता जितेन्द्र, न्यूज़ 18

करोना करोना करोना करोना,
बुहान शहरिया से आईल करोना।

एक दिन अफिसिया में रहली हं बैठल,
शरीरिया के अपने हम रहली हं अईथल,
टिबिया पे जइसे गइल ह नजरिया,
की अंखिया में आईल अंसुवन के बदरिया,
देखली की लाशन के लाशन उठत ह,
केहू के मेहदिया सिन्दूरवा मिटत ह,
त हाथ जोड़ रो के करी हम बिनतिया,
हे भगवन अब आके तुमही कुछ करो ना,
करोना करोना करोना करोना,
बुहान शहरिया से आईल करोना।

जहजिया टरेनिया दफ्तर बंद भइलें,
छोट मोट बजरिया शहर बन्द भइलें,
मंदिर कै घंटा मजारी कै चादर,
गाड़ी घोड़ा कै सफर बंद भइलें,
त हाथ जोड़ नेता अभिनेता कहैं कि,
घरही में रहो तुम, बाहर तुम रहो ना,
करोना करोना करोना करोना,
बुहान शहरिया से आईल करोना।

समय जइसे जइसे बीतै लगल भइया,
मरीजन कै संख्या बढ़ै लगल भइया,
कुछहु के डाक्टर दवाई मिलल त,
कुछहु के बॉडी सडै लगल भइया,
त हाथ जोड़ पीएम डक्टर लोग से बोले
कि तुमही हो भगवन, तुमही कुछ करो ना,
करोना करोना करोना करोना,
बुहान शहरिया से आईल करोना।

बन्द भइल धंधा मजदूरी कै चिंता,
शहरवा से घरवा कै दूरी कै चिंता,
घर कै किराया लइकन कै पढ़ाई,
केहु के अपने नूरी अ भूरी कै चिंता,
त गउवां में माई असमनवा में देखै,
कि तुम्हरी है मर्ज़ी, तुमही कुछहु करो ना,
करोना करोना करोना करोना,
बुहान शहरिया से आईल करोना।

जितेन्द्र,
न्यूज़ 18

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