ISSN2320-5733

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कविता : परनाम डाक्टर साहब डॉक्टर्स को समर्पित अवधी कविता प्रभांशु ओझा, सहायक प्रवक्ता, हंसराज महाविद्यालय

परनाम डॉक्टर साहब, परनाम डॉक्टर साहब
तू राष्ट्रगीत, तू राष्ट्रगान, तोहसे बाटय भारत महान
भारत माई के दिल मा तू, हर सुखदुख मा शामिल हा तू
हर हिंदुस्तानी कै, अभिमान डॉक्टर साहब
परनाम डॉक्टर साहब, परनाम डॉक्टर साहब
कांकर पाथर सहि बड़ा होंय, चौबिस घंटा जे खड़ा होंय
भूलेन जे आपन भूंख प्यास, जेकरे दम पा ई चलै सांस
जिनगी का जे उजियार करैं, भवसागर से जे पार करैं
हर अच्छे करमन कै, परिनाम डॉक्टर साहब
परनाम डॉक्टर साहब, परनाम डॉक्टर साहब
तोहरेव तौ एक परिवार अहै, सुख-दुःख कै एक संसार अहै
प्यार रस्ता जोहत, एक जोड़ी अँखियाँ यार अहै
मुल तू तौ समझ्या दुनिया का परिवार डॉक्टर साहब
परनाम डॉक्टर साहब, परनाम डॉक्टर साहब
तू सिरीकृष्ण, तू सिरीराम
बसैं तुहीं मा चार धाम
अपने अंगुरी के जादू से तू बनय देह्या जिनगी तमाम
ई सांस चला थै जेसे ऊ जान डॉक्टर साहब
परनाम डॉक्टर साहब, परनाम डॉक्टर साहब

प्रभांशु ओझा,
सहायक प्रवक्ता, हंसराज महाविद्यालय
Email ID: Prabhansukmc@gmail.com
मोबाइल न. 9968993201

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